भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 15 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 14.15 · रजसि प्रलयं गत्वा जायते

रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते ।
तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥

rajasi pralayaṃ gatvā karmasaṅgiṣu jāyate |
tathā pralīnastamasi mūḍhayoniṣu jāyate ||

हिन्दी अनुवाद

रजोगुण की प्रधानता में मरने वाला कर्मों में आसक्त लोगों के बीच जन्म लेता है; और तमोगुण में मरने वाला मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 14.15 का अर्थ क्या है?

रजोगुण की प्रधानता में मरने वाला कर्मों में आसक्त लोगों के बीच जन्म लेता है; और तमोगुण में मरने वाला मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।

भगवद्गीता 14.15 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।