भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.1 · परं भूयः प्रवक्ष्यामि
परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् ।
यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥
paraṃ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṃ jñānamuttamam |
yajjñātvā munayaḥ sarve parāṃ siddhimito gatāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान बोले: मैं फिर से तुम्हें वह परम ज्ञान बताऊँगा जो सभी ज्ञानों में श्रेष्ठ है, जिसे जानकर सभी मुनि इस संसार से परे परम सिद्धि को प्राप्त हुए।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.1 का अर्थ क्या है?
श्रीभगवान बोले: मैं फिर से तुम्हें वह परम ज्ञान बताऊँगा जो सभी ज्ञानों में श्रेष्ठ है, जिसे जानकर सभी मुनि इस संसार से परे परम सिद्धि को प्राप्त हुए।
भगवद्गीता 14.1 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।