भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 27 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.27 · समं सर्वेषु भूतेषु
समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् ।
विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ॥
samaṃ sarveṣu bhūteṣu tiṣṭhantaṃ parameśvaram |
vinaśyatsvavinaśyantaṃ yaḥ paśyati sa paśyati ||
हिन्दी अनुवाद
जो नाशवान सब प्राणियों में अविनाशी परमेश्वर को समान रूप से स्थित देखता है, वही वास्तव में देखता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.27 का अर्थ क्या है?
जो नाशवान सब प्राणियों में अविनाशी परमेश्वर को समान रूप से स्थित देखता है, वही वास्तव में देखता है।
भगवद्गीता 13.27 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।