भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.1 · इदं शरीरं कौन्तेय

इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते ।
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ॥

idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate |
etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: हे कुन्तीपुत्र, इस शरीर को क्षेत्र कहा जाता है। जो इसे जानता है, उसे इस विषय के जानकार क्षेत्रज्ञ कहते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.1 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: हे कुन्तीपुत्र, इस शरीर को क्षेत्र कहा जाता है। जो इसे जानता है, उसे इस विषय के जानकार क्षेत्रज्ञ कहते हैं।

भगवद्गीता 13.1 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।