भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 9 · संजय
भगवद्गीता 11.9 · एवमुक्त्वा ततो हरिः
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥
evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ |
darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram ||
हिन्दी अनुवाद
संजय बोले: हे राजन, ऐसा कहकर महायोगेश्वर हरि ने तब पार्थ को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया —
प्रसंग
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.9 का अर्थ क्या है?
संजय बोले: हे राजन, ऐसा कहकर महायोगेश्वर हरि ने तब पार्थ को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया —
भगवद्गीता 11.9 किसने कहा है?
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।