भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 7 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 11.7 · इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् ।
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद् द्रष्टुमिच्छसि ॥
ihaikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ paśyādya sacarācaram |
mama dehe guḍākeśa yaccānyad draṣṭumicchasi ||
हिन्दी अनुवाद
हे गुडाकेश, आज यहीं मेरे शरीर में एक स्थान पर समाया हुआ सम्पूर्ण चर-अचर जगत देखो, और जो कुछ भी तुम देखना चाहो, वह भी।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.7 का अर्थ क्या है?
हे गुडाकेश, आज यहीं मेरे शरीर में एक स्थान पर समाया हुआ सम्पूर्ण चर-अचर जगत देखो, और जो कुछ भी तुम देखना चाहो, वह भी।
भगवद्गीता 11.7 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।