भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 53 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 11.53 · नाहं वेदैर्न तपसा न न
नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया ।
शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा ॥
nāhaṃ vedairna tapasā na dānena na cejyayā |
śakya evaṃvidho draṣṭuṃ dṛṣṭavānasi māṃ yathā ||
हिन्दी अनुवाद
जैसे तुमने मुझे देखा है, वैसे न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से मुझे देखा जा सकता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.53 का अर्थ क्या है?
जैसे तुमने मुझे देखा है, वैसे न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से मुझे देखा जा सकता है।
भगवद्गीता 11.53 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।