भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 40 · अर्जुन
भगवद्गीता 11.40 · नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते
नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व ।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं
सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥
namaḥ purastādatha pṛṣṭhataste
namo’stu te sarvata eva sarva |
anantavīryāmitavikramastvaṃ
sarvaṃ samāpnoṣi tato’si sarvaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
आपको आगे से नमस्कार, पीछे से नमस्कार; हे सर्वस्वरूप, आपको सब ओर से नमस्कार है। आपका पराक्रम अनन्त है, आपकी शक्ति असीम है; आप सबमें व्याप्त हैं, इसलिए आप ही सब कुछ हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.40 का अर्थ क्या है?
आपको आगे से नमस्कार, पीछे से नमस्कार; हे सर्वस्वरूप, आपको सब ओर से नमस्कार है। आपका पराक्रम अनन्त है, आपकी शक्ति असीम है; आप सबमें व्याप्त हैं, इसलिए आप ही सब कुछ हैं।
भगवद्गीता 11.40 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।