भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 4 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.4 · मन्यसे यदि तच्छक्यं मया

मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥

manyase yadi tacchakyaṃ mayā draṣṭumiti prabho |
yogeśvara tato me tvaṃ darśayātmānamavyayam ||

हिन्दी अनुवाद

हे प्रभु, यदि आप मानते हैं कि मैं उसे देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप के दर्शन कराइए।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.4 का अर्थ क्या है?

हे प्रभु, यदि आप मानते हैं कि मैं उसे देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप के दर्शन कराइए।

भगवद्गीता 11.4 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।