भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 34 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 11.34 · द्रोणं च भीष्मं च च
द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च
कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् ।
मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा
युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान् ॥
droṇaṃ ca bhīṣmaṃ ca jayadrathaṃ ca
karṇaṃ tathānyānapi yodhavīrān |
mayā hatāṃstvaṃ jahi mā vyathiṣṭhā
yudhyasva jetāsi raṇe sapatnān ||
हिन्दी अनुवाद
द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण और अन्य महान योद्धा भी मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं — तुम उन्हें मारो, व्यथित मत होओ। युद्ध करो; तुम रणभूमि में शत्रुओं को अवश्य जीतोगे।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.34 का अर्थ क्या है?
द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण और अन्य महान योद्धा भी मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं — तुम उन्हें मारो, व्यथित मत होओ। युद्ध करो; तुम रणभूमि में शत्रुओं को अवश्य जीतोगे।
भगवद्गीता 11.34 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।