भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 2 · अर्जुन
भगवद्गीता 11.2 · भवाप्ययौ हि भूतानां मया
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया ।
त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम् ॥
bhavāpyayau hi bhūtānāṃ śrutau vistaraśo mayā |
tvattaḥ kamalapatrākṣa māhātmyamapi cāvyayam ||
हिन्दी अनुवाद
हे कमलनयन, मैंने आपसे प्राणियों की उत्पत्ति और विनाश के बारे में विस्तार से सुना है, और आपकी अविनाशी महिमा के बारे में भी।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.2 का अर्थ क्या है?
हे कमलनयन, मैंने आपसे प्राणियों की उत्पत्ति और विनाश के बारे में विस्तार से सुना है, और आपकी अविनाशी महिमा के बारे में भी।
भगवद्गीता 11.2 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।