भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 19 · अर्जुन
भगवद्गीता 11.19 · अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य-
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य-
मनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् ।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं
स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ॥
anādimadhyāntamanantavīrya-
manantabāhuṃ śaśisūryanetram |
paśyāmi tvāṃ dīptahutāśavaktraṃ
svatejasā viśvamidaṃ tapantam ||
हिन्दी अनुवाद
मैं आपको आदि, मध्य और अन्त से रहित, अनन्त शक्ति वाला, असंख्य भुजाओं वाला देख रहा हूँ; सूर्य और चन्द्रमा आपके नेत्र हैं, आपका मुख धधकती अग्नि है, और आप अपने तेज से इस सारे जगत को तपा रहे हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.19 का अर्थ क्या है?
मैं आपको आदि, मध्य और अन्त से रहित, अनन्त शक्ति वाला, असंख्य भुजाओं वाला देख रहा हूँ; सूर्य और चन्द्रमा आपके नेत्र हैं, आपका मुख धधकती अग्नि है, और आप अपने तेज से इस सारे जगत को तपा रहे हैं।
भगवद्गीता 11.19 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।