भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 38 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 10.38 · दण्डो दमयतामस्मि

दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् ।
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ॥

daṇḍo damayatāmasmi nītirasmi jigīṣatām |
maunaṃ caivāsmi guhyānāṃ jñānaṃ jñānavatāmaham ||

हिन्दी अनुवाद

दमन करने वालों में मैं दण्ड हूँ, विजय चाहने वालों में नीति; रहस्यों में मैं मौन हूँ और ज्ञानियों का ज्ञान भी मैं ही हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 10.38 का अर्थ क्या है?

दमन करने वालों में मैं दण्ड हूँ, विजय चाहने वालों में नीति; रहस्यों में मैं मौन हूँ और ज्ञानियों का ज्ञान भी मैं ही हूँ।

भगवद्गीता 10.38 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।