भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 10 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 10.10 · तेषां सततयुक्तानां भजतां

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् ।
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥

teṣāṃ satatayuktānāṃ bhajatāṃ prītipūrvakam |
dadāmi buddhiyogaṃ taṃ yena māmupayānti te ||

हिन्दी अनुवाद

जो सदा मुझसे जुड़े रहकर प्रेमपूर्वक मेरा भजन करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग देता हूँ जिससे वे मुझ तक पहुँच जाते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 10.10 का अर्थ क्या है?

जो सदा मुझसे जुड़े रहकर प्रेमपूर्वक मेरा भजन करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग देता हूँ जिससे वे मुझ तक पहुँच जाते हैं।

भगवद्गीता 10.10 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।