भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 35 · अर्जुन

भगवद्गीता 1.35 · एतान्न हन्तुमिच्छामि

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥

etānna hantumicchāmi ghnato’pi madhusūdana |
api trailokyarājyasya hetoḥ kiṃ nu mahīkṛte ||

हिन्दी अनुवाद

हे मधुसूदन, चाहे ये मुझे मार डालें, मैं इन्हें मारना नहीं चाहता — तीनों लोकों के राज्य के लिए भी नहीं, फिर इस धरती के लिए तो कहना ही क्या।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.35 का अर्थ क्या है?

हे मधुसूदन, चाहे ये मुझे मार डालें, मैं इन्हें मारना नहीं चाहता — तीनों लोकों के राज्य के लिए भी नहीं, फिर इस धरती के लिए तो कहना ही क्या।

भगवद्गीता 1.35 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।