भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 33 · अर्जुन
भगवद्गीता 1.33 · येषामर्थे काङ्क्षितं नो
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च ।
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
yeṣāmarthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca |
ta ime’vasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca ||
हिन्दी अनुवाद
जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख चाहते हैं, वही लोग जीवन और धन का मोह छोड़कर यहाँ युद्ध के लिए खड़े हैं —
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.33 का अर्थ क्या है?
जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख चाहते हैं, वही लोग जीवन और धन का मोह छोड़कर यहाँ युद्ध के लिए खड़े हैं —
भगवद्गीता 1.33 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।