आरती · गणेश

गणेश आरती — जय गणेश देवा

“जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” गणेश जी की सबसे लोकप्रिय हिंदी आरती है। पूजा के आरंभ में और गणेशोत्सव में हर शाम इसे गाया जाता है।

देवतागणेश
रचनाकारपारंपरिक (अंतिम पद में कवि सूरदास का नाम आता है)
भाषाहिन्दी
पद5

कब पढ़ें: गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव में, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी को, और किसी भी शुभ काम की शुरुआत में गाई जाती है।

आरती

  1. जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    jay gaṇeś jay gaṇeś, jay gaṇeś devā |
    mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||

    गणेश देवा की जय हो, जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव (शिव) हैं।

  2. एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी ।
    माथे सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

    ek danta dayāvanta, cār bhujā dhārī |
    māthe sindūr sohe, mūse kī savārī ||

    वे एक दाँत वाले और दया से भरे हैं, उनकी चार भुजाएँ हैं; उनके माथे पर सिंदूर शोभा देता है और वे मूषक की सवारी करते हैं।

  3. पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
    लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ॥

    pān caṛhe phūl caṛhe, aur caṛhe mevā |
    laḍḍuan kā bhog lage, santa kareṃ sevā ||

    उन्हें पान, फूल और मेवे चढ़ाए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संत उनकी सेवा करते हैं।

  4. अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया ।
    बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

    andhan ko ām̐kh det, koṛhin ko kāyā |
    bām̐jhan ko putra det, nirdhan ko māyā ||

    वे अंधों को आँखें और रोगियों को स्वस्थ काया देते हैं, निःसंतान को संतान और निर्धन को धन देते हैं।

  5. सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    sūr śyām śaraṇ āe, saphal kīje sevā |
    mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||

    सूरदास आपकी शरण में आए हैं — हे पार्वती और महादेव के पुत्र, हमारी सेवा को सफल कीजिए।

पाठ गिनती

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देवनागरी पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है; हिन्दी अर्थ हमारा अपना है। अलग-अलग संस्करणों और गायकों के पाठ में थोड़ा अंतर हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश आरती — जय गणेश देवा की रचना किसने की?

गणेश आरती — जय गणेश देवा की रचना पारंपरिक (अंतिम पद में कवि सूरदास का नाम आता है) ने की है। यह हिन्दी में है।

गणेश आरती — जय गणेश देवा का पाठ कब करना चाहिए?

गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव में, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी को, और किसी भी शुभ काम की शुरुआत में गाई जाती है।

गणेश आरती — जय गणेश देवा किस बारे में है?

“जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” गणेश जी की सबसे लोकप्रिय हिंदी आरती है। पूजा के आरंभ में और गणेशोत्सव में हर शाम इसे गाया जाता है।