पूजा विधि · माँ दुर्गा

नवरात्रि घटस्थापना और घर पर दुर्गा पूजा

नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है — एक पवित्र घट या कलश की स्थापना, जिसमें नौ रातों के लिए देवी का आवाहन किया जाता है; अक्सर इसके पास मिट्टी में जौ बोए जाते हैं। हर दिन दुर्गा के नौ रूपों में से एक की पूजा होती है, और समापन अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन से होता है।

समर्पितमाँ दुर्गा
समयपहले दिन 30–45 मिनट; रोज़ 15–20 मिनट
अगली तिथि (नई दिल्ली)गुरु, 30 सित॰ 2027

कब करें: नवरात्रि के पहले दिन, प्रतिपदा की सुबह, दिन के पहले तिहाई भाग में; सटीक समय आपके स्थानीय पंचांग में दिया होता है।

पूजा सामग्री

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प्रसाद और नैवेद्य

कन्या पूजन के लिए पूरी, काले चने और सूजी का हलवा; रोज़ फल और मिठाइयाँ।

आरती और स्तोत्र

मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः — मंत्र जाप काउंटर के साथ

पूजा विधि: चरण-दर-चरण

  1. स्थान तैयार करें

    घर का उत्तर-पूर्वी (ईशान) कोना साफ़ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर दुर्गा माँ का चित्र रखें।

  2. जौ बोएँ

    मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरें और जौ के बीज बोएँ। नौ दिनों में इनका अंकुरित होना परंपरा से समृद्धि का संकेत माना जाता है।

  3. कलश स्थापित करें

    कलश में जल भरें, उसमें सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें, गले पर मौली बाँधें, आम के पत्ते लगाएँ और ऊपर नारियल रखें। इसे जौ वाले पात्र पर या उसके पास रखें।

  4. देवी का आवाहन

    नौ दिनों का संकल्प लें और कलश तथा चित्र में दुर्गा माँ का आवाहन करें; कुमकुम, फूल, अक्षत और लाल चुनरी अर्पित करें।

    ॐ दुं दुर्गायै नमः

    मंत्र जाप काउंटर से जप करें →

  5. ज्योति जलाएँ

    दीपक जलाएँ — अगर अखंड ज्योति रख रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह नौ दिन तक सुरक्षित रूप से जल सके।

  6. रोज़ की पूजा

    हर सुबह और शाम उस दिन के रूप को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — और आरती गाएँ।

    सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

  7. कन्या पूजन

    अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं (अक्सर नौ) और एक बालक को बुलाएँ, उनके पैर धोएँ, तिलक लगाएँ, और देवी के रूप में उनका सम्मान करते हुए उन्हें पूरी, चना और हलवा खिलाएँ।

  8. नवरात्रि का समापन

    अंतिम दिन विदाई की पूजा करें, जौ के अंकुर आशीर्वाद के रूप में बाँटें, और मिट्टी का विसर्जन करें या उसे सम्मान से हटाएँ।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • अखंड ज्योति को कभी ऐसी जगह न रखें जहाँ वह गिर सके या कुछ जला सके; दीपक पर जाली या काँच का आवरण लगाएँ।
  • व्रत के नियम अलग-अलग होते हैं — फल, दूध, साबूदाना और सिंघाड़े का आटा आम हैं।
  • क्षेत्रीय परंपराओं में बहुत अंतर है: बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल, दक्षिण में गोलू, गुजरात में गरबा।
पूजा की परंपराएँ क्षेत्र, समुदाय और परिवार के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह गाइड घरों में प्रचलित सामान्य विधि बताती है; जहाँ आपकी पारिवारिक परंपरा अलग हो, वहाँ बड़ों या पुरोहित की सलाह मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शारदीय नवरात्रि आरंभ 2027 कब है?

शारदीय नवरात्रि आरंभ गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को है (नई दिल्ली)।

क्या घटस्थापना ज़रूरी है?

घर पर नवरात्रि पूजा की पारंपरिक शुरुआत यही है, लेकिन जो परिवार कलश स्थापित नहीं कर सकते, वे भी रोज़ दीपक, फूल और आरती से देवी की पूजा कर सकते हैं।

दुर्गा के नौ रूप कौन-से हैं?

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — हर रात के लिए एक।

AstroMandap संपादकीय टीम · अपडेट: · संपादकीय मानक (अंग्रेज़ी)