भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 28 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 9.28 · शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे
शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः ।
संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥
śubhāśubhaphalairevaṃ mokṣyase karmabandhanaiḥ |
saṃnyāsayogayuktātmā vimukto māmupaiṣyasi ||
हिन्दी अनुवाद
इस प्रकार तुम शुभ और अशुभ फल देने वाले कर्म-बन्धनों से छूट जाओगे। संन्यास-योग में मन को स्थिर करके तुम मुक्त हो जाओगे और मुझे प्राप्त होगे।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 9.28 का अर्थ क्या है?
इस प्रकार तुम शुभ और अशुभ फल देने वाले कर्म-बन्धनों से छूट जाओगे। संन्यास-योग में मन को स्थिर करके तुम मुक्त हो जाओगे और मुझे प्राप्त होगे।
भगवद्गीता 9.28 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।