भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.24 · अहं हि सर्वयज्ञानां च च

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च ।
न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते ॥

ahaṃ hi sarvayajñānāṃ bhoktā ca prabhureva ca |
na tu māmabhijānanti tattvenātaścyavanti te ||

हिन्दी अनुवाद

क्योंकि सब यज्ञों का भोक्ता और स्वामी मैं ही हूँ। पर वे मुझे तत्त्व से नहीं जानते, इसलिए नीचे गिर जाते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.24 का अर्थ क्या है?

क्योंकि सब यज्ञों का भोक्ता और स्वामी मैं ही हूँ। पर वे मुझे तत्त्व से नहीं जानते, इसलिए नीचे गिर जाते हैं।

भगवद्गीता 9.24 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।