भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 17 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 9.17 · पिताहमस्य जगतो माता धाता
पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः ।
वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च ॥
pitāhamasya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ |
vedyaṃ pavitramoṃkāra ṛksāma yajureva ca ||
हिन्दी अनुवाद
इस जगत का पिता, माता, धारण करने वाला और पितामह मैं हूँ; जानने योग्य तत्त्व, पवित्र करने वाला, ॐकार, तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 9.17 का अर्थ क्या है?
इस जगत का पिता, माता, धारण करने वाला और पितामह मैं हूँ; जानने योग्य तत्त्व, पवित्र करने वाला, ॐकार, तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।
भगवद्गीता 9.17 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।