भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.1 · इदं तु ते गुह्यतमं

इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे ।
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥

idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmyanasūyave |
jñānaṃ vijñānasahitaṃ yajjñātvā mokṣyase’śubhāt ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: तुम दोष-दृष्टि नहीं रखते, इसलिए मैं तुम्हें यह अत्यन्त गुप्त ज्ञान उसके अनुभव सहित बताता हूँ, जिसे जानकर तुम सब अशुभ से छूट जाओगे।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.1 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: तुम दोष-दृष्टि नहीं रखते, इसलिए मैं तुम्हें यह अत्यन्त गुप्त ज्ञान उसके अनुभव सहित बताता हूँ, जिसे जानकर तुम सब अशुभ से छूट जाओगे।

भगवद्गीता 9.1 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।