भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 8.20 · परस्तस्मात्तु

परस्तस्मात्तु भावोऽन्योऽव्यक्तोऽव्यक्तात्सनातनः ।
यः स सर्वेषु भूतेषु नश्यत्सु न विनश्यति ॥

parastasmāttu bhāvo’nyo’vyakto’vyaktātsanātanaḥ |
yaḥ sa sarveṣu bhūteṣu naśyatsu na vinaśyati ||

हिन्दी अनुवाद

किन्तु उस अव्यक्त से भी परे एक और सनातन अव्यक्त सत्ता है, जो सब प्राणियों के नष्ट हो जाने पर भी नष्ट नहीं होती।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 8.20 का अर्थ क्या है?

किन्तु उस अव्यक्त से भी परे एक और सनातन अव्यक्त सत्ता है, जो सब प्राणियों के नष्ट हो जाने पर भी नष्ट नहीं होती।

भगवद्गीता 8.20 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।