भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 18 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 8.18 · अव्यक्ताद्व्यक्तयः
अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे ।
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके ॥
avyaktādvyaktayaḥ sarvāḥ prabhavantyaharāgame |
rātryāgame pralīyante tatraivāvyaktasaṃjñake ||
हिन्दी अनुवाद
ब्रह्मा का दिन आरम्भ होते ही अव्यक्त से सब व्यक्त पदार्थ प्रकट होते हैं, और रात आने पर वे उसी अव्यक्त में विलीन हो जाते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 8.18 का अर्थ क्या है?
ब्रह्मा का दिन आरम्भ होते ही अव्यक्त से सब व्यक्त पदार्थ प्रकट होते हैं, और रात आने पर वे उसी अव्यक्त में विलीन हो जाते हैं।
भगवद्गीता 8.18 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।