भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 16 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 8.16 · आब्रह्मभुवनाल्लोकाः
आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥
ābrahmabhuvanāllokāḥ punarāvartino’rjuna |
māmupetya tu kaunteya punarjanma na vidyate ||
हिन्दी अनुवाद
हे अर्जुन, ब्रह्मलोक तक के सभी लोक पुनरावर्ती हैं, अर्थात् वहाँ से लौटना पड़ता है; किन्तु हे कुन्तीपुत्र, मुझे प्राप्त कर लेने पर फिर जन्म नहीं होता।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 8.16 का अर्थ क्या है?
हे अर्जुन, ब्रह्मलोक तक के सभी लोक पुनरावर्ती हैं, अर्थात् वहाँ से लौटना पड़ता है; किन्तु हे कुन्तीपुत्र, मुझे प्राप्त कर लेने पर फिर जन्म नहीं होता।
भगवद्गीता 8.16 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।