भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 13 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 8.13 · ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥

omityekākṣaraṃ brahma vyāharanmāmanusmaran |
yaḥ prayāti tyajandehaṃ sa yāti paramāṃ gatim ||

हिन्दी अनुवाद

— जो ब्रह्म-स्वरूप एकाक्षर ॐ का उच्चारण करते हुए और मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 8.13 का अर्थ क्या है?

— जो ब्रह्म-स्वरूप एकाक्षर ॐ का उच्चारण करते हुए और मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

भगवद्गीता 8.13 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।