भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 7.19 · बहूनां जन्मनामन्ते

बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते ।
वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ॥

bahūnāṃ janmanāmante jñānavānmāṃ prapadyate |
vāsudevaḥ sarvamiti sa mahātmā sudurlabhaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

अनेक जन्मों के अन्त में ज्ञानी यह जानकर मेरी शरण आता है कि “सब कुछ वासुदेव ही है।” ऐसा महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 7.19 का अर्थ क्या है?

अनेक जन्मों के अन्त में ज्ञानी यह जानकर मेरी शरण आता है कि “सब कुछ वासुदेव ही है।” ऐसा महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है।

भगवद्गीता 7.19 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।