भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 16 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 7.16 · चतुर्विधा भजन्ते मां
चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन ।
आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ॥
caturvidhā bhajante māṃ janāḥ sukṛtino’rjuna |
ārto jijñāsurarthārthī jñānī ca bharatarṣabha ||
हिन्दी अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन, चार प्रकार के पुण्यात्मा लोग मेरी उपासना करते हैं — संकट में पड़ा हुआ, ज्ञान का जिज्ञासु, धन-वैभव चाहने वाला और ज्ञानी।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 7.16 का अर्थ क्या है?
हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन, चार प्रकार के पुण्यात्मा लोग मेरी उपासना करते हैं — संकट में पड़ा हुआ, ज्ञान का जिज्ञासु, धन-वैभव चाहने वाला और ज्ञानी।
भगवद्गीता 7.16 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।