भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 11 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 7.11 · बलं बलवतां चाहं

बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् ।
धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ ॥

balaṃ balavatāṃ cāhaṃ kāmarāgavivarjitam |
dharmāviruddho bhūteṣu kāmo’smi bharatarṣabha ||

हिन्दी अनुवाद

हे भरतश्रेष्ठ, बलवानों में मैं वह बल हूँ जो कामना और आसक्ति से रहित है; और प्राणियों में मैं वह काम हूँ जो धर्म के विरुद्ध नहीं है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 7.11 का अर्थ क्या है?

हे भरतश्रेष्ठ, बलवानों में मैं वह बल हूँ जो कामना और आसक्ति से रहित है; और प्राणियों में मैं वह काम हूँ जो धर्म के विरुद्ध नहीं है।

भगवद्गीता 7.11 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।