भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 40 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 6.40 · पार्थ नैवेह नामुत्र

पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।
न हि कल्याणकृत्कश्चिद्‌दुर्गतिं तात गच्छति ॥

pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate |
na hi kalyāṇakṛtkaścid‌durgatiṃ tāta gacchati ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: हे पार्थ, ऐसे व्यक्ति का न इस लोक में नाश होता है, न परलोक में। हे तात, भलाई के काम करने वाला कोई भी व्यक्ति दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 6.40 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: हे पार्थ, ऐसे व्यक्ति का न इस लोक में नाश होता है, न परलोक में। हे तात, भलाई के काम करने वाला कोई भी व्यक्ति दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।

भगवद्गीता 6.40 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।