भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 6.19 · यथा दीपो निवातस्थो सोपमा

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥

yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā |
yogino yatacittasya yuñjato yogamātmanaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

जैसे बिना हवा वाले स्थान में रखा दीपक नहीं डगमगाता, वही उपमा उस योगी के लिए दी जाती है जिसका चित्त वश में है और जो आत्मा के योग में लगा है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 6.19 का अर्थ क्या है?

जैसे बिना हवा वाले स्थान में रखा दीपक नहीं डगमगाता, वही उपमा उस योगी के लिए दी जाती है जिसका चित्त वश में है और जो आत्मा के योग में लगा है।

भगवद्गीता 6.19 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।