भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.1 · इमं विवस्वते योगं
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् ।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥
imaṃ vivasvate yogaṃ proktavānahamavyayam |
vivasvānmanave prāha manurikṣvākave’bravīt ||
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान बोले: यह अविनाशी योग मैंने विवस्वान (सूर्य) को बताया था; विवस्वान ने इसे मनु से कहा, और मनु ने इक्ष्वाकु को सिखाया।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.1 का अर्थ क्या है?
श्रीभगवान बोले: यह अविनाशी योग मैंने विवस्वान (सूर्य) को बताया था; विवस्वान ने इसे मनु से कहा, और मनु ने इक्ष्वाकु को सिखाया।
भगवद्गीता 4.1 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।