भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 63 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 2.63 · क्रोधाद्भवति सम्मोहः
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥
krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ |
smṛtibhraṃśād buddhināśo buddhināśātpraṇaśyati ||
हिन्दी अनुवाद
क्रोध से मूढ़ता आती है, मूढ़ता से स्मृति डगमगा जाती है, स्मृति के भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है, और बुद्धि के नष्ट होने पर मनुष्य का पतन हो जाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 2.63 का अर्थ क्या है?
क्रोध से मूढ़ता आती है, मूढ़ता से स्मृति डगमगा जाती है, स्मृति के भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है, और बुद्धि के नष्ट होने पर मनुष्य का पतन हो जाता है।
भगवद्गीता 2.63 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।