भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 59 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.59 · विषया विनिवर्तन्ते

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः ।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ॥

viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ |
rasavarjaṃ raso’pyasya paraṃ dṛṣṭvā nivartate ||

हिन्दी अनुवाद

आहार छोड़ देने वाले देहधारी से विषय तो दूर हो जाते हैं, पर उनका रस (लालसा) नहीं जाता। परम तत्त्व का दर्शन हो जाने पर वह रस भी छूट जाता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.59 का अर्थ क्या है?

आहार छोड़ देने वाले देहधारी से विषय तो दूर हो जाते हैं, पर उनका रस (लालसा) नहीं जाता। परम तत्त्व का दर्शन हो जाने पर वह रस भी छूट जाता है।

भगवद्गीता 2.59 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।