भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 53 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.53 · श्रुतिविप्रतिपन्ना ते

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला ।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥

śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā |
samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi ||

हिन्दी अनुवाद

तरह-तरह की श्रुतियों को सुनकर भटकी हुई तुम्हारी बुद्धि जब समाधि में अचल और स्थिर हो जाएगी, तब तुम योग को प्राप्त कर लोगे।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.53 का अर्थ क्या है?

तरह-तरह की श्रुतियों को सुनकर भटकी हुई तुम्हारी बुद्धि जब समाधि में अचल और स्थिर हो जाएगी, तब तुम योग को प्राप्त कर लोगे।

भगवद्गीता 2.53 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।