भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 50 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 2.50 · बुद्धियुक्तो जहातीह उभे
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥
buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte |
tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam ||
हिन्दी अनुवाद
समबुद्धि से युक्त व्यक्ति इसी जीवन में पुण्य और पाप दोनों को पीछे छोड़ देता है। इसलिए योग में लग जाओ; कर्मों में कुशलता ही योग है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 2.50 का अर्थ क्या है?
समबुद्धि से युक्त व्यक्ति इसी जीवन में पुण्य और पाप दोनों को पीछे छोड़ देता है। इसलिए योग में लग जाओ; कर्मों में कुशलता ही योग है।
भगवद्गीता 2.50 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।