भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 2.24 · अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
acchedyo’yamadāhyo’yamakledyo’śoṣya eva ca |
nityaḥ sarvagataḥ sthāṇuracalo’yaṃ sanātanaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
यह काटा नहीं जा सकता, जलाया नहीं जा सकता, भिगोया या सुखाया नहीं जा सकता। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 2.24 का अर्थ क्या है?
यह काटा नहीं जा सकता, जलाया नहीं जा सकता, भिगोया या सुखाया नहीं जा सकता। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।
भगवद्गीता 2.24 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।