भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 10 · संजय

भगवद्गीता 2.10 · तमुवाच हृषीकेशः भारत

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ॥

tamuvāca hṛṣīkeśaḥ prahasanniva bhārata |
senayorubhayormadhye viṣīdantamidaṃ vacaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

हे भारत, तब दोनों सेनाओं के बीच शोक में डूबे अर्जुन से हृषीकेश ने मानो मुस्कुराते हुए ये वचन कहे।

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.10 का अर्थ क्या है?

हे भारत, तब दोनों सेनाओं के बीच शोक में डूबे अर्जुन से हृषीकेश ने मानो मुस्कुराते हुए ये वचन कहे।

भगवद्गीता 2.10 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।