भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 61 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.61 · ईश्वरः सर्वभूतानां
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥
īśvaraḥ sarvabhūtānāṃ hṛddeśe’rjuna tiṣṭhati |
bhrāmayansarvabhūtāni yantrārūḍhāni māyayā ||
हिन्दी अनुवाद
हे अर्जुन, ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में रहता है और अपनी माया से सब प्राणियों को ऐसे घुमाता है मानो वे किसी यन्त्र पर चढ़े हों।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.61 का अर्थ क्या है?
हे अर्जुन, ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में रहता है और अपनी माया से सब प्राणियों को ऐसे घुमाता है मानो वे किसी यन्त्र पर चढ़े हों।
भगवद्गीता 18.61 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।