भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 39 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 18.39 · यदग्रे चानुबन्धे च सुखं

यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः ।
निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम् ॥

yadagre cānubandhe ca sukhaṃ mohanamātmanaḥ |
nidrālasyapramādotthaṃ tattāmasamudāhṛtam ||

हिन्दी अनुवाद

जो सुख आरम्भ में भी और परिणाम में भी मनुष्य को मोह में डालता है, और नींद, आलस्य तथा प्रमाद से उत्पन्न होता है, वह तामस कहा गया है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 18.39 का अर्थ क्या है?

जो सुख आरम्भ में भी और परिणाम में भी मनुष्य को मोह में डालता है, और नींद, आलस्य तथा प्रमाद से उत्पन्न होता है, वह तामस कहा गया है।

भगवद्गीता 18.39 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।