भगवद्गीता · अध्याय 16, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 16.24 · तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं
तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ ।
ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥
tasmācchāstraṃ pramāṇaṃ te kāryākāryavyavasthitau |
jñātvā śāstravidhānoktaṃ karma kartumihārhasi ||
हिन्दी अनुवाद
इसलिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके निर्णय में शास्त्र को ही प्रमाण मानो। शास्त्र के विधान को जानकर तुम्हें इस संसार में अपना कर्म करना चाहिए।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवासुर संपद विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 24 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 16.24 का अर्थ क्या है?
इसलिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके निर्णय में शास्त्र को ही प्रमाण मानो। शास्त्र के विधान को जानकर तुम्हें इस संसार में अपना कर्म करना चाहिए।
भगवद्गीता 16.24 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 16, दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवासुर संपद विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।