भगवद्गीता · अध्याय 12, श्लोक 12 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 12.12 · श्रेयो हि विशिष्यते
श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते ।
ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥
śreyo hi jñānamabhyāsājjñānāddhyānaṃ viśiṣyate |
dhyānātkarmaphalatyāgastyāgācchāntiranantaram ||
हिन्दी अनुवाद
केवल अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है, ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है, और ध्यान से भी कर्मफल का त्याग श्रेष्ठ है; क्योंकि ऐसे त्याग के तुरन्त बाद शान्ति मिलती है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 12.12 का अर्थ क्या है?
केवल अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है, ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है, और ध्यान से भी कर्मफल का त्याग श्रेष्ठ है; क्योंकि ऐसे त्याग के तुरन्त बाद शान्ति मिलती है।
भगवद्गीता 12.12 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।