भगवद्गीता · अध्याय 12, श्लोक 10 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 12.10 · अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि भव

अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव ।
मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥

abhyāse’pyasamartho’si matkarmaparamo bhava |
madarthamapi karmāṇi kurvansiddhimavāpsyasi ||

हिन्दी अनुवाद

यदि अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे लिए कर्म करने में लग जाओ। मेरे लिए कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि प्राप्त कर लोगे।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 12.10 का अर्थ क्या है?

यदि अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे लिए कर्म करने में लग जाओ। मेरे लिए कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि प्राप्त कर लोगे।

भगवद्गीता 12.10 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।